यशोधरा [Yashodhara]
इस रचना में गुप्त जी ने यशोधरा के त्याग की परम्परा को...
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इस रचना में गुप्त जी ने यशोधरा के त्याग की परम्परा को मुख्य रूप से उद्घोषित किया है|
राजभवन की सुख समृद्धि तथा ऐश्वर्य और भोग-विलास को ही नहीं वरन् यशोधरा जैसी पत्नी तथा राहुल जैसे एकमात्र पुत्र का परित्याग कर के निर्वाण के मार्ग में निकले भगवान बुद्ध की कथा इतनी महान बनी कि स्वयं बौद्ध धर्म में जन्म और विस्तार की प्रेरक कथा बन गई।
मैथिलीशरण गुप्त मूलतः कवि थे, जो राष्ट्रकवि बन गये। अतः उन्होंने भगवान बुद्ध की कथा को काव्य-कथा के रूप में प्रस्तुत किया।
इस रचना में गुप्त जी ने यशोधरा के त्याग की परम्परा को मुख्य रूप से उद्घोषित किया है, जिसने भगवान बुद्ध के राजभवन लैटने और स्वयं यशोधरा के कक्ष में उससे भेंट करने जाने पर अपने बेटे राहुल का महान पुत्र-दान दे कर अपने मन की महानता को प्रतिष्ठित किया।
राष्ट्रकवि की यह रचना मनोरंजक ही नहीं प्रेरक भी है।
- Format:
- Pages:213 pages
- Publication:
- Publisher:साहित्य प्रेस
- Edition:
- Language:hin
- ISBN10:
- ISBN13:
- kindle Asin:B0DN899V7B
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